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Self-Driving Cars in India2026: क्या भारत की सड़कों पर सफल होंगी ऑटोनॉमस कारें? जानें बड़ी चुनौतियाँ और टॉप मॉडल्स

Self-Driving Cars: दुनियाभर में टेस्ला (Tesla) और वेमो (Waymo) जैसी कंपनियों ने ड्राइवरलेस कारों की क्रांति ला दी है। भारत में भी ADAS (Advanced Driver Assistance Systems) लेवल-2 वाली कारें अब आम होने लगी हैं। लेकिन क्या हम उस दौर के लिए तैयार हैं जहाँ ड्राइवर की जरूरत ही न हो?(Self-Driving Cars)

Self-Driving Cars: भारत में ऑटोनॉमस कारों की स्थिति 

भारत में वर्तमान में ‘पूर्ण ऑटोनॉमस’ (Level-5) कारें सड़कों पर नहीं हैं, लेकिन Level-2 ADAS तकनीक वाले वाहनों की बाढ़ आ गई है। ये कारें खुद ब्रेक लगा सकती हैं, लेन में रह सकती हैं और टक्कर से बचाव कर सकती हैं। हाल ही में “AI Impact Summit 2026” में भारत में बनी कुछ ड्राइवरलेस प्रोटोटाइप कारों का प्रदर्शन भी किया गया है।

Self-Driving Cars: प्रमुख चुनौतियां

क्यों मुश्किल है भारत का रास्ता?

भारत की सड़कों पर ऑटोमेशन को सफल बनाने में 5 सबसे बड़ी बाधाएं हैं:

  1. अव्यवस्थित ट्रैफिक: लेन अनुशासन (Lane Discipline) की कमी और अचानक सामने आने वाले पैदल यात्री या जानवर AI सेंसर्स को भ्रमित कर देते हैं।
  2. बुनियादी ढांचा (Infrastructure): कई सड़कों पर स्पष्ट लेन मार्किंग और ट्रैफिक साइनबोर्ड नहीं हैं, जो ऑटोनॉमस ड्राइविंग के लिए अनिवार्य हैं।
  3. कानूनी और नैतिक मुद्दे: यदि ड्राइवरलेस कार से दुर्घटना होती है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी? कार मालिक की या सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी की?
  4. साइबर सुरक्षा: हैकिंग का खतरा और यात्रियों के डेटा की प्राइवेसी एक बड़ी चिंता है।
  5. रोजगार का संकट: भारत जैसे देश में लाखों लोग ड्राइविंग से अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं, ऐसे में पूर्ण स्वचालन का सामाजिक विरोध हो सकता है।

Self-Driving Cars: टॉप मॉडल्स

भारत में बेहतरीन ADAS कारें (2026)

यदि आप आज ऐसी कार खरीदना चाहते हैं जो “खुद ड्राइविंग” का अनुभव दे सके, तो ये टॉप मॉडल्स हैं:

कार मॉडलADAS लेवलमुख्य फीचर्स
Mahindra XUV700 / 7XOLevel 2अडैप्टिव क्रूज कंट्रोल, ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग।
Tata Safari / HarrierLevel 2ब्लाइंड स्पॉट डिटेक्शन, लेन कीप असिस्ट।
Hyundai Tucson / CretaLevel 2360-डिग्री कैमरा, स्टॉप एंड गो क्रूज कंट्रोल।
Mercedes-Benz EQSLevel 3हैंड्स-फ्री ड्राइविंग (सीमित परिस्थितियों में)।
Tesla Model 3 (संभावित)Level 2+ऑटोपायलट और सिटी-स्ट्रीट नेविगेशन।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या भारत में Self-Driving Cars कानूनी रूप से मान्य हैं?

वर्तमान में पूरी तरह से ड्राइवरलेस (Level-5) कारें सड़कों पर चलाने की कानूनी अनुमति नहीं है। केवल ADAS फीचर्स वाले वाहनों की अनुमति है, जहाँ ड्राइवर का नियंत्रण अनिवार्य है।

2. क्या टेस्ला भारत में अपनी Self-Driving Cars लॉन्च करेगी?

टेस्ला 2026 में भारत में अपनी एंट्री की तैयारी कर रही है, लेकिन भारतीय सड़कों की स्थिति देखते हुए उनका ‘फुल सेल्फ-ड्राइविंग’ (FSD) मोड यहाँ सीमित रूप से काम करेगा।

3. क्या Self-Driving Cars सुरक्षित हैं?

विकसित देशों में इन्हें सुरक्षित माना जाता है, लेकिन भारत के मिश्रित ट्रैफिक (साइकिल, रिक्शा, गाय) में इनकी सफलता अभी भी परीक्षण के घेरे में है।

4. क्या ADAS वाली कारें सामान्य कारों से महंगी होती हैं?

हाँ, सेंसर्स, रडार और कैमरों के कारण इनकी कीमत सामान्य मॉडल से ₹1.5 लाख से ₹3 लाख तक अधिक हो सकती है।

5. क्या भारी बारिश या कोहरे में Self-Driving Cars काम करती हैं? 

वर्तमान ADAS और ऑटोनॉमस सिस्टम कैमरों और रडार पर निर्भर करते हैं। अत्यधिक भारी बारिश या घने कोहरे में इन सेंसर्स की दृश्यता (Visibility) कम हो जाती है, जिससे सिस्टम अस्थायी रूप से काम करना बंद कर सकता है। ऐसे समय में ड्राइवर को मैन्युअल नियंत्रण लेना पड़ता है।

6. क्या भारत में ‘ड्राइवरलेस टैक्सी’ (Robotaxi) शुरू होने की कोई संभावना है? 

बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों के कुछ टेक-पार्क और कैंपस में ‘ऑटोनॉमस शटल’ के ट्रायल चल रहे हैं। हालांकि, सार्वजनिक सड़कों पर ‘रोबोटैक्सी’ शुरू होने में अभी कम से कम 5-7 साल का समय लग सकता है।

7. क्या Self-Driving Cars के लिए अलग से इंश्योरेंस लेना होगा? 

वर्तमान में भारत में ADAS कारों के लिए सामान्य बीमा ही मिलता है, लेकिन भविष्य में बीमा कंपनियां “Autonomous Mode” के लिए विशेष एड-ऑन कवर पेश कर सकती हैं, क्योंकि इसमें दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी सॉफ्टवेयर की भी हो सकती है।

8. क्या ये कारें ट्रैफिक पुलिस के संकेतों और हाथ के इशारों को समझ सकती हैं? 

यह सबसे बड़ी चुनौती है। आधुनिक AI हाथ के इशारों को पहचानने के लिए ट्रेन किया जा रहा है, लेकिन भारत में ट्रैफिक पुलिस के जटिल इशारों को 100% सटीकता से समझना अभी भी मुश्किल है। वर्तमान में ये कारें केवल स्टैंडर्ड ट्रैफिक लाइट्स और साइनबोर्ड्स को पहचानती हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। भारत में ऑटोनॉमस ड्राइविंग तकनीक अभी भी शुरुआती और परीक्षण चरण (Trial Phase) में है। ADAS फीचर्स का उपयोग करते समय हमेशा सतर्क रहें और स्टीयरिंग पर अपना नियंत्रण बनाए रखें। किसी भी कार के ऑटोमेशन फीचर्स पर पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।(Self-Driving Cars)

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